Fabulous Outcome :Lijjat Pappad

7d66caa12506067337813fcd0742bad7

मुंबई की रहने वाली जसवंती जमनादास पोपट ने अपना परिवार चलाने के लिए 1959 में पापड़ बेलने का काम शुरू किया था। जसवंती बेन गरीब परिवार से ताल्लुक रखती थी और कम पढ़ी-लिखी भी थी लेकिन उनमें कारोबार की अच्‍छी समझ थी। उन्होंने इस काम में अपने साथ और छह गरीब बेरोजगार महिलाओं को जोड़ा और 80 रुपये का कर्ज लिया और पापड़ बेलने का काम शुरु किया। उनके साथ शामिल हुईं महिलाओं के नाम थे उजमबेन नरानदास कुण्डलिया, पार्वतीबेन रामदास ठोदानी, लागुबेन अमृतलाल गोकानी, बानुबेन तन्ना, जयाबेन विठलानी और उनके साथ एक और महिला थी, जिसे पापड़ों को बेचने की जिम्मेदारी ली थी। यह सभी महिलाएं गुजराती परिवार से थीं, तो जाहिर सी बात है कि उन्हें पापड़-खाखरा बनाने में महारत हासिल थीं। इन महिलाओं द्वारा 15 मार्च 1959 को लिज्जत का पहला पापड़ बेला गया था। पापड़ बेलने की शुरूआत किसी बड़े उद्योग या फिर पैसे कमाने के उद्देश्य से नहीं हुई थी।

Untitled-design-27-2

सातों ने तय किया था कि वे इस व्यवसाय के लिए किसी से चंदा नही मांगेगी, चाहे उनका व्यवसाय घाटे में ही क्यों ना चला जाये। लेकिन कुछ माह की मेहनत में ही उन्होंने 80 रुपए का उधार चुका दिया और फिर चार पैकेट से 40 और फिर 400 तक पहुंचने में वक्त नहीं लगा। 80 रुपये से शुरू हुआ यह कारोबार आज सालाना 800 करोड़ रुपये का कारोबार करती है। इस कारोबार से तकरीबन 45 हजार महिलाएं जुड़ी हुई हैं और इसके 62 ब्रांच हैं। ये सभी महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अपनी खराब आर्थिक स्थिति के कारण ज्‍यादा शिक्षा प्राप्‍त नहीं कर पाई हुई हैं।  लेकिन वो इसे अपनी कमी नहीं मानती हैं और यही इस कारोबार की सफलता का राज है। 1962 में ग्रुप ने अपने पापड़ का नामकरण किया और यह नाम था ‘लिज्जत पापड़’। लिज्जत गुजराती शब्द है, जिसका अर्थ स्वादिष्ट होता है। साथ ही, इस ऑर्गेनाइजेशन का नाम रखा गया ‘श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़’।

यहां अभी भी पापड़ों को मशीन से नहीं बल्कि हाथों से बनाया जाता है और आटा गूंथना, लोई बनाना, पापड़ बनाना, सुखाना और पैंकिग इस पापड़ के मुख्य चरण हैं। लिज्जत ग्रुप की दो सबसे अच्छी बातें यह है कि लिज्जत पापड़ सरकार से किसी भी तरह की आर्थिक सहायता नहीं लेती और यहां काम करने वाली हर महिला को ‘बहन’ शब्द से संबोधित किया जाता है, जिस कारण सब एक समान दिखते हैं।

ये कंपनी बाकी कंपनियों से थोड़ी अलग है, इस व्यापार में सभी महिला सदस्य हैं। यहां अध्यक्षता कार्यकारी समिति से सदस्य बारी-बारी से संभालते हैं और वो भी सबकी सहमति से चुने जाते हैं। यानी सबको मौका दिया जाता है जो इस उद्योग की सफलता में एक अहम किरदार निभाते हैं। हर शाखा का नेतृत्व एक संचालिका करती है। इन शाखाओं के संचालन के लिए 21 सदस्यों वाली एक केंद्रीय प्रबंधन समिति भी बनी है। जिसमें एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, दो सचिव और दो कोषाध्यक्ष सहित छह निर्वाचित अधिकारी हैं। इनका चुनाव सर्वसम्मति से किया जाता है और जो हर साल बदलती रहती हैं। आज की तारीख में श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ अब पापड़ के अलावा डिटर्जेंट और ब्रेड बनाने का काम भी कर रही है।

#rahulinvision

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.